Santoshi Mata Aarti Lyrics | जय सन्तोषी माता

Santoshi Mata Aarti Lyrics: Santoshi Mata is a goddess in Hindu folklore. She is reputed as “Santoshi Mata”, her name. Santoshi Mata is specially worshiped by women of North India. The vow (ritual fast) called Santoshi Maa Vrat, performed by women on 16 consecutive Fridays, wins the favor of the goddess.

Santoshi Mata Aarti Lyrics

Santoshi Mata Bhajan Lyrics – जय सन्तोषी माता

Jai Santoshi Mata, Maiya Jai Santoshi Mata।
Apne Sewak Jan Ki, Sukh Sampati Data॥

Sundar Chir Sunahri Maa Dharan Kinhon।
Hira Pana Damke, Tan Shringar Linyoh॥
॥ Jai Santoshi Mata…॥

Geru Lal Chhata Chhavi, Badan Kamal Sohe।
Mand Hansat Karunamayi, Tribhuvan Jan Mohe॥
॥ Jai Santoshi Mata…॥

Swarna Sinhasan Baithi, Chanvar Dhure Pyare।
Dhup, Deep, Madhu, Mewa, Bhog Dhare Nyare॥
॥ Jai Santoshi Mata…॥

Gud Aur Chana Param Priya, Tamen Santosh Kiyo।
Santoshi Kahlai, Bhaktan Vaibhav Diyo॥
॥ Jai Santoshi Mata…॥

Shukrawar Priya Manat, Aaj Divas Sohi।
Bhakti Mandali Chhai, Katha Sunat Mohi॥
॥ Jai Santoshi Mata…॥

Mandir Jag Mag Jyoti, Mangal Dhwani Chhai।
Vinai Kare ham Sewak, Charnan Sir Nai॥
॥ Jai Santoshi Mata…॥

Bhakti Bhawmai, Puja Angikrit Kijai।
Jo Man Vasai Hamare, Ichhit Phal Dijai॥
॥ Jai Santoshi Mata…॥

Dukh Daridri Raug, Sankat Mukt Kijai।
bahu Dhan Dhany Bhare Ghar, Sukh Saubhagya Keejai॥
॥ Jai Santoshi Mata…॥

Dhyan Dhare Jo Tera, Manvanchhit Phal Payo।
Puja Katha Shravan Kar, Ghar Anand Aayo॥
॥ Jai Santoshi Mata…॥

Charan Gahe Ki Lajja, Rakhiyo Jagdambe।
Sankat Tu Hi Niware, Dayamayi Ambe॥
॥ Jai Santoshi Mata…॥

Santoshi Mata Ki Aarti, Jo Koi Jan Gavai।
Riddhi-siddhi Sukh Sampati, Ji Bhar Ke Pavai॥
॥ Jai Santoshi Mata…॥

Jai Santoshi Mata, Maiya Jai Santoshi Mata।
Apne Sewak Jan Ki, Sukh Sampati Data॥

Santoshi Mata Aarti Details

Aarti: Santoshi Mata Ki Aarti
Singer: Anuradha Paudwal
Music label: T-Series

Santoshi Mata Aarti Lyrics In Hindi

जय सन्तोषी माता, मैया सन्तोषी माता
अपने सेवक जन की, सुख सम्पत्ति दाता
जय सन्तोषी माता
जय सन्तोषी माता, मैया सन्तोषी माता
अपने सेवक जन की, सुख सम्पत्ति दाता
जय सन्तोषी माता

सुन्दर चीर सुनहरी माँ धारण कीन्हों
हीरा पन्ना दमके, तन श्रृंगार कीन्हों
जय सन्तोषी माता

गेरू लाल छटा छवि, बदन कमल सोहे
मन्द हंसत करुणामयी, त्रिभुवन मन मोहे
जय सन्तोषी माता

स्वर्ण सिंहासन बैठी, चंवर ढुरें प्यारे
धूप दीप मधुमेवा, भोग धरें न्यारे
जय सन्तोषी माता

गुड़ और चना परमप्रिय, तामे संतोष किये
सन्तोषी कहलाई, भक्तन वैभव दिये
जय सन्तोषी माता

शुक्रवार प्रिय मानत, आज दिवस सोही
भक्त मण्डली छाई, कथा सुनत मोही
जय सन्तोषी माता

मन्दिर जगमग ज्योति, मंगल ध्वनि छाई
विनय करें हम सेवक, चरनन सिर नाई
जय सन्तोषी माता

भक्ति भावमय पूजा, अंगीकृत कीजै
जो मन बसै हमारे, इच्छा फल दीजै
जय सन्तोषी माता

दुखी दरिद्री, रोगी, संकट मुक्त किये
बहु धन-धान्य भरे घर, सुख सौभाग्य दिये
जय सन्तोषी माता

ध्यान धरे जन तेरा, मनवांछित फल पायो
पूजा कथा श्रवण कर, घर आनन्द आयो
जय सन्तोषी माता

शरण गहे की लज्जा, राखियो जगदम्बे
संकट तू ही निवारे, दयामयी अम्बे
जय सन्तोषी माता

शुक्रवार प्रिय मानती, आज दिवस सोही
भक्त मण्डली छाई, कथा सुनत मोही
जय सन्तोषी माता

सन्तोषी माता की आरती, जो कोई जन गावे
ऋद्धि-सिद्धि, सुख-सम्पत्ति, जी भर के पावे
जय सन्तोषी माता

जय सन्तोषी माता, मैया सन्तोषी माता
अपने सेवक जन की, सुख सम्पत्ति दाता
जय सन्तोषी माता

जय सन्तोषी माता, मैया सन्तोषी माता
अपने सेवक जन की, सुख सम्पत्ति दाता
जय सन्तोषी माता

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